श्रीकृष्णाक्षरमालिका
Hindi/Devanagari

Bhagavan Sri Krishna - The Incarnate of The Supreme
श्री कृष्णाक्षरमालिका – परिचय
श्री कृष्णाक्षरमालिका भगवान श्री कृष्ण की स्तुति में काव्यकण्ठ वासिष्ठ श्री गणपति मुनि द्वारा रचित एक सुंदर भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। इसमें श्री कृष्ण को जनार्दन, माधव, गोविन्द, नारायण और हरि के रूप में श्रद्धापूर्वक वंदित किया गया है।
यह स्तोत्र अक्षरमालिका के रूप में, अर्थात् अक्षरों की माला के समान रचा गया है। इसमें श्लोक संस्कृत वर्णमाला के क्रम में — स्वरों से आरंभ होकर व्यंजनों तक — आगे बढ़ते हैं। प्रत्येक श्लोक श्री कृष्ण के विविध दिव्य नामों, रूपों, गुणों, लीलाओं और महिमाओं की स्तुति करता है। साथ ही “कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे” की बार-बार आने वाली पंक्ति पूरे स्तोत्र को मधुर, संगीतमय और मंत्रमय लय प्रदान करती है।
इस स्तोत्र में श्री कृष्ण केवल गोकुल के प्रिय प्रभु के रूप में ही नहीं, बल्कि भक्तों की रक्षा करने वाले, दुष्टता का नाश करने वाले, भय को दूर करने वाले, ज्ञान प्रदान करने वाले और समस्त जीवों के अंतरात्मा रूप में प्रकाशित होने वाले परमात्मा के रूप में पूजित हैं। साथ ही यह स्तोत्र विष्णु, राम, नृसिंह, वराह, कूर्म आदि दिव्य अवतारों के रूपों और महिमाओं को भी सुंदर ढंग से श्री कृष्ण से जोड़ता है।
सरल पुनरावृत्ति, काव्यात्मक रचना और गहरे भक्तिभाव के माध्यम से श्री कृष्णाक्षरमालिका भगवान श्री कृष्ण के चरणों में अर्पित एक स्तुतिगीत और भक्तिपूर्ण स्मरणमाला बन जाती है।
॥ काव्यकण्ठ वासिष्ठ श्रीगणपतिमुनि विरचितम् श्रीकृष्णाक्षरमालिका ॥
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। १।।
अव्यय माधव अन्तविवर्जित अब्धिसुताप्रिय कान ्त हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २ ।।
आशरनाशन आदिविवर्जित आत्मज्ञानद नाथ हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३॥
इन्द्रमुखामरबृन्दसमर्चितपादसरोरुहयुग्म हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।॥ ४॥
ईश्वरसन्नुत ईतिभयापह राक्षसनाशनदक्ष हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ५।।
उन्नतमानस उच्चपदप्रद उज्ज्वलविग्रह देव हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ६ ।।
ऊर्जोनाशितशात्रवसञ्चय जलधरगर्जितकण्ठ हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ७ ।।
ऋषिजनसन्नुत दिव्यकथामृत भव्यगुणोज्ज्वल चित्तहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥८॥
ॠकारप्रिय ऋक्षगणेश्वरवन्दितपादपयोज हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ९ ।।
ऌतकसमर्चित काङक्षितदायक कुक्षिगताखिललोकहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। १० ।।
ॡवल्लोकाचारसमीरित रूपविवर्जित नित्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ११ ।।
एकमनोमुनिमानसगोचर गोकुलपालक वेषहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। १२ ।।
ऐरावतकरसन्निभदोर्बल निर्जितदानवसैन्यहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। १३ ।।
ओङ्काराम्बुज वनकलहंसक कलिमलनाशन नामहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।।१४।।
औन्नत्याश्रय संश्रितपालक पाकनिबर्हणसहजहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। १५॥
अङ्गदसेवित भङ्गविवर्जित सङ्गविवर्जित सेव्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। १६ ।।
अस्तगिरिस्थितभास्करलोहितचरणसरोजतलाढ्य हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।।१७।।
कमलावल्लभ कमलविलोचन कमलविभाहरपाद हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। १८ ।।
खरमुखदानवसैनिकखण्डन खेचरकीर्तित कीर्तिहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। १९ ।।
गणपतिसेवित गुणगणसागर वरगतिनिर्जित नागहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २० ।।
घटिकापर्वतवासि नृकेसरि वेषविनाशितदोषहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २१ ।।
ङः प्रत्येकं न यथा वाक्ये नाथ तथा ते चित्ते क्रोधः ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २२ ।।
चपलाभासुरमेघनिभप्रभ कमलाभासुरवक्ष हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २३ ।।
छलयुतदूरचलाचललोचन गोपवधूहृदयेश हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २४ ।।
जगतीवल्लभरूपपरात्पर सर्वजगज्जनपूज्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २५॥
झङ्कारध्वनिकारिमधुवृतमञ्जुलकेशकलाप हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २६ ।।
ञाक्षरयुतजाधात्वर्थे परिनिष्ठित नैष्ठिकगम्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २७ ।।
टङ्कारध्वनिकारिधनुर्धरशातशराहतदैत्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २८ ।।
ठमिति मनुं वा समिति मनुं वा जपतां सिद्धिद नाथ हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। २९ ।।
डमरुकरेश्वरपूजितनिर्जितरावणदानव राम हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३० ।।
ढक्कावाद्यप्रिय भयवारण विनयविवर्जितदूर हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३१।।
णटधात्वर्थे पण्डितमण्डितसकलावयवोद्भासि हरे ।
कृष्णं जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३२ ।।
तत्त्वमसीति व्याहृतिवाच्यप्राच्यधिनायकपूज्य हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३३॥
थूत्कारानिलवेगनभोगतसप्तसमुद्रवराह हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३४ ।।
दयितालिङ्गितवक्षोभासुर भूसुरपूजितपाद हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३५।।
धरणीतनयाजीवितनायक वालिनिबर्हण राम हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३६ ।।
नारायण माधव केशव गोपालक हे गोविन्द हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३७॥
परमेश्वर वरपक्षिकुलेश्वरवाहन मोहनरूप हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३८ ।।
फालविलोचन पङ्कजसम्भव कीर्तितसद्गुणजाल हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ३९ ।।
बलरिपुपूजित बलजितदानव बलदेवानुज बाल हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४० ।।
भवभयनाशन भक्तजनप्रिय भूभरनाशनकारि हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४१।।
मायामोहितसकलजगज्जनमारीचासुरमथन हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४२ ।।
यमुनातटिनीवरतटविहरण यक्षगणेश्वरवन्द्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४३॥
रामरमेश्वर रावणमर्दन रतिललनाधव तात हरे ।
कृष्ण जनार्दन क ृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४४।।
लक्ष्मणसेवित मङ्गललक्षणलक्षित शिक्षितदुष्ट हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४५।।
वालिविनाशन वारिधिबन्धन वनचरसेवितपाद हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४६ ।।
शङ्करकीर्त्तित निजनामामृतशत्रुनिबर्हणबाणहरे ।
कृष्ण जना र्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४७।।
षड्गुणमण्डित षड्दोषापह दोषाचरकुलकाल हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४८ ।।
सदय सदाशिवपूजितपादुक हृदयविराजित दयित हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ४९।।
हस्तचतुष्टयभासुरनन्दक शङ्खगदारथचरण हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृ ष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ५० ।।
ळुबुळुबुनिःस्वनमज्जितमन्दरपर्वतधारणकूर्म हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ५१॥
क्षयितनिशाटक्षान्तिगुणाढ्य क्षेत्रज्ञात्मक देव हरे।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ५२॥
गणपतिपण्डितरचितं स्तोत्रं कृष्णस्येदं जयतु धरण्याम् ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ५३॥
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ।। ५४ ।।
॥ इति श्रीभगवन्महर्षिरमणान्तेवासिनो वासिष्ठस्य
नरसिंहसूनोर्गणपतेः कृता ‘श्रीकृष्णाक्षरमालिका’ सम्पूर्णम् ॥
