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श्रीतारकरामनामस्तुतिः

Hindi/Devanagari

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Bhagavan Sri Ram - The Incarnate of the Supreme

श्री तारक राम नाम स्तुति – परिचय

श्री तारक राम नाम स्तुति भगवान् श्रीराम की महिमा और “राम” नाम की मुक्तिदायिनी तारक-शक्ति का स्तवन करने वाला एक संक्षिप्त और मधुर स्तोत्र है। इसकी रचना काव्यकण्ठ वासिष्ठ श्री गणपति मुनि ने की है।


इस स्तुति में श्रीराम को केवल दशरथ के पुत्र के रूप में ही नहीं, बल्कि नाम, रूप, गुण और कर्म से परे परम सत्यस्वरूप के रूप में भी आराधना की गई है। “दशरथनन्दन” और “दाशरथे” जैसे संबोधन बार-बार आने से इस स्तोत्र में गहरी भक्ति और मंत्र-जैसी मधुर लय उत्पन्न होती है।


यह स्तुति एक गम्भीर आध्यात्मिक संदेश भी देती है। संसार के संबंध और अनुभव माया से निर्मित हैं, जबकि निर्मल “राम” नाम को ऋषियों ने तारक कहा है — ऐसा नाम जो जीव को संसार-सागर से पार ले जाता है। सरल होते हुए भी अत्यंत गहन श्लोकों के माध्यम से भक्त रक्षा, जन्म-मरण के दुःखों से मुक्ति, समभाव, सर्वहितभाव और सत्संग की प्रार्थना करता है।


यह स्तोत्र भक्ति, वेदान्त-ज्ञान और नाम-स्मरण को सुंदर रूप से एक करता है, और रामनाम को अंतःशुद्धि, शांति और मोक्ष का प्रत्यक्ष मार्ग बताता है।


॥ काव्यकण्ठ वासिष्ठ श्रीगणपतिमुनिविरचितम् श्रीतारकरामनामस्तुतिः ॥


दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।।१।।


निर्गुण निष्कल नित्यनिरञ्जन निर्गतमत्सर गम्यविभो ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। २ ।।


संसारेऽस्मिन् निर्गतसारे पाहि विपारे दशवदनारे ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। ३ ।।


सर्वसमत्वं सर्वहितत्वं सत्सङ्गत्वं देहि विभो मे ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। ४ ।।


जननक्लेशम् मरणक्लेशम् नाशय गमनागमनक्लेशम् ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।।५।।


को मे पुत्रः का मे जाया माया सेयं पाहि विभो माम् ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। ६ ।।


सनकसनन्दनसंस्तुतचरितं जानीते त्वां गोगुणरहितम् ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। ७ ।।


नास्ति वपुस्ते नास्ति तवाख्या नास्ति च कर्म स्वस्तिद विष्णो ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनंन्दन दाशरथे ।। ८ ।।


माया कल्पितमिदमखिलं ते रूपं कर्म च नाम च विविधम् ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। ९।।


नाम तु रामेत्यमलमिदं ते तारकं ऋषयः परिभाषन्ते ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।।१०।।


चतुरास्यस्त्वं चक्रधरस्त्वं परमेशस्त्वं परमात्मा त्वम् ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। ११ ।।


तत्त्वसमूहादुपरि लसन्तं पुरुषं साङख्याः प्रवदन्ति त्वाम् ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। १२ ।।


दशशतपत्रे दशमुखशत्रो योगविदस्त्वामालोकन्ते ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। १३ ।।


जैमिनिमुख्याः कर्मफलं त्वां देव वदन्तो नन्दन्ति स्म ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। १४ ।।


वेदान्ते ये निष्ठितमतयः ते प्राहुस्त्वामेकमभेदम् ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।।१५।।


गणपतिकविना रचितं स्तोत्रं ललितं प्रीत्यै भवतो भूयात् ।

दशरथनन्दन दशरथनन्दन दशरथनन्दन दाशरथे ।। १६ ।।


॥ इति श्रीभगवन्महर्षिरमणान्तेवासिनो वासिष्ठस्य

नरसिंहसूनोर्गणपतेः कृता ‘श्रीतारकरामनामस्तुतिः’ सम्पूर्णम् ॥

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